क्यूं हमारे हीं साथ एसा होता हैं,
आंखे कम, और दिल ज्यादा रोता हैं..
तडपते रहेते है उनको याद करके,
और एक वो हैं जो हर वक्त सोता ही रहेता हैं..
क्यूं हमारे हीं साथ एसा होता हे..
कहेती आंखे, वो देखती हैं जहांसे
बहेती हई धडकने चलती हैं वहांसे
धडकनो के चलनेशे, चैन हमारा होता हें
कोई तो बताए, क्यूं हमारे हीं साथ एसा होता हैं..
हम चलते हैं साथ उनके, और वो हें के दूर हीं रहेते हैं
जुबांसे कम, और आंखोसे हीं सबकूछ कहेते हैं
खुली आंखोमेंभी ये दिल सपने संजोता हैं
कोई तो बताए, क्यूं हमारे हीं साथ ऐसा होता हैं..
सामने होते हुएभी उनका चहेरा छूपा-छूपा रहेता हैं
हसते हुएभी उनकी आंखोसे पानी बहेता रहेता हैं
क्यूं जीत लेते हैं वो दिल, यहीं तो एकलौता हैं
कोई तो बताए, क्यूं हमारे हीं साथ एसा होता हैं..
आंखे कम, औग दिल ज्यादा रोता हैं.. - अंकित एम. पंड्या
સમુદ્ર મંથન - રત્ન 12
आंखे कम, और दिल ज्यादा रोता हैं..
तडपते रहेते है उनको याद करके,
और एक वो हैं जो हर वक्त सोता ही रहेता हैं..
क्यूं हमारे हीं साथ एसा होता हे..
कहेती आंखे, वो देखती हैं जहांसे
बहेती हई धडकने चलती हैं वहांसे
धडकनो के चलनेशे, चैन हमारा होता हें
कोई तो बताए, क्यूं हमारे हीं साथ एसा होता हैं..
हम चलते हैं साथ उनके, और वो हें के दूर हीं रहेते हैं
जुबांसे कम, और आंखोसे हीं सबकूछ कहेते हैं
खुली आंखोमेंभी ये दिल सपने संजोता हैं
कोई तो बताए, क्यूं हमारे हीं साथ ऐसा होता हैं..
सामने होते हुएभी उनका चहेरा छूपा-छूपा रहेता हैं
हसते हुएभी उनकी आंखोसे पानी बहेता रहेता हैं
क्यूं जीत लेते हैं वो दिल, यहीं तो एकलौता हैं
कोई तो बताए, क्यूं हमारे हीं साथ एसा होता हैं..
आंखे कम, औग दिल ज्यादा रोता हैं.. - अंकित एम. पंड्या
સમુદ્ર મંથન - રત્ન 12

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