આર્ટીકલ અને પોસ્ટ :-

Thursday, 31 January 2013

थोडा तो खुल के हस मेरे यार

थोडा तो खुल के हस मेरे यार, देख किस्मत क्यां रंग लाई हैं
जो हे हीं नहीं ईस दुनिया की, आज खुद वो तेरे घर आई हैं

तुं कल तक था अकेला, तेरी ये जोडी जो रबने बनाई हैं
जो हैं तेरे खुशियो की चाबी, आज खूद वो तेरे घर आई हैं

कुछ पल थे तेरे कल खाली, कुछ बाते मेने आज सुनाई हैं
जो हैं रानी तेरे सपनो की, आज खुद वो तेरे घर आई हैं

बेन्ड-बाजा और बारात, क्यां धुमधाम से शादी रचाई हैं
जो हैं ख्वाईश तेरे अपनो की, आज खुद वो तेरे घर आई हैं

हमेशा हसती रहें, गाती रहें, जो दुनिया तूने सजाई हैं
जो है धून तेरे संगीत कीं, आज खूद वो तेरे घर आई हैं

ईसे न दवा कहुं , न दुआ कहुं, दोस्त को दोस्तो की बधाई हैं
जो हैं तुलसी तेरे आंगन कीं, आज खुद वो तेरे घर आई हैं

खुदा करे वो सारी सच हो, जो भी मन्नते तुने लगाई हैं
जो हैं तमन्ना तेरे दिल की, आज खुद वो तेरे घर आई हैं

शहेनाई से गुंज उठे वो सारी जन्नते, जहां तेरी सगाई हैं
जो हैं लीखी तेरी किस्मत में, आज खुद वो तेरे घर आई हैं..
(For my Friend: Tushar Chudasama & Nikita Bhabhi) - अंकित एम. पंड्या

સમુદ્ર મંથન - રત્ન 13

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